Biography of Swami Vivekananda - Most Mind Blowing Facts

Biography of Swami Vivekananda - Most Mind Blowing Facts

 Let us tell you that Swami Vivekananda ji (Narendranath Dutt) was born on 12 January 1863 in Kolkata. His father's name was Vishwanath Dutt and mother's name was Bhuvaneshwari Devi. Swami Vivekananda's father was a lawyer by profession and mother was deeply religious.

आपको बता दे कि स्वामी विवेकानंद जी (नरेन्द्रनाथ दत्त ) का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ| उनके पिता जी का नाम विश्वनाथ दत्त और माता जी का नाम भुवनेश्वरी देवी था| स्वामी विवेकानंद जी के पिता पेशे से एक वकील और माता जी गहरी धार्मिक थी| 

 

Swami Vivekananda's met his guru Ramakrishna Ji in 1881 in Dakhineshwar and he stayed there for a long time. At that time Swami Vivekananda was going through a spiritual phase. A famous question for Swami Vivekananda Ji Guru Ji was "Have you seen God"? Which changed his life forever.

 स्वामी विवेकानंद जी के गुरु रामकृष्ण जी से उनकी मुलाक़ात 1881 में दक्खिनेश्वर में हुई और वे काफी समय वही रुके| उस समय स्वामी विवेकानंद जी आध्यात्मिक दौर से गुजर रहे थे| स्वामी विवेकानंद जी  गुरु जी के लिए एक प्रसिद्ध प्रश्न था "क्या आपने भगवान को देखा है "? जिसने उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया| 

 

 

In 1885, his guru Ramakrishna was diagnosed with cancer of his throat, due to which he had to be shifted to a garden house in Kosore. Swami Vivekananda took great care of his Guru Ji along with all the fellow students.

सन 1885 में, उनके गुरु रामकृष्ण जी को उनके गले के कैंसर का पता चला, जिसके कारण कोसोर में एक बाग़ के घर में स्थान्तरित  करना पड़ा| स्वामी विवेकानंद जी साथी सभी छात्रों के साथ मिलकर अपने गुरु जी का बहुत ध्यान रखते थे| 

 

Before giving up his body, Swami Vivekananda's guru, Ramakrishna, made him the leader of a new monastic order, which highlighted the importance of service to men in the most effective form of worship of the Lord.

अपने शरीर का त्याग करने से पूर्व, स्वमी विवेकानदं जी के गुरु जी रामकृष्ण जी ने उन्हें एक नए मठ के आदेश का नेता बनाया, जिसने भगवान् के पूजा के सबसे प्रभावी रूप में पुरषो के लिए सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला| 

 

After the death of Guru Ramakrishna, Swami Vivekananda started living in Baranagar with his young disciples and in 1887 he took the formal vow of sanyasa and since then he was known as Swami Vivekananda.

गुरु रामकृष्ण की मृत्यु के बाद, स्वामी विवेकानंद अपने युवा शिष्यों के साथ बारानगर में रहने लगे और 1887 में उन्होंने सन्यास की औपचारिक प्रतिज्ञा ली और तभी से उन्हें स्वामी विवेकानंद जी के नाम से जाना गया| 

 

In 1888, Swami Vivekananda resolved to embark on a journey by exploring India extensively in his early years, to take the message of his Guru Ramakrishna to the world and lead the life of a wandering monk. 

सन 1888 में अपने गुरु रामकृष्ण जी के संदेश दुनिया के सामने रखने के लिए , स्वामी विवेकानंद जी ने प्रारंभिक वर्षो में भारत की व्यपाक खोज करते हुए एक यात्रा शुरू करने का संकल्प लिया और पैदल चले , भिक्षा पर रहे और भटकते भिक्षु के जीवन का नेतृव्त किया| 

 

 

The main purpose of his visit was to make sense of the poverty and backwardness existing among the people and he lived in this environment during his journey.
In the meantime he understood that the public desperately needed two kinds of knowledge - one which allows them to improve their economic condition and the other which helps them to build confidence and strengthen their moral sense.

उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य जनता के बीच मौजूद गरीबी और पिछड़ेपन का आभास करना था और वे अपनी यात्रा के दौरान इसी माहौल में रहे|
इसी बीच उन्होंने समझा कि जनता को दो प्रकार के ज्ञान की सख़्त आवश्यकता है - एक जो उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार करने की अनुमति देता है और दूसरा जो उनको विश्वास का निर्माण करने और उनकी नैतिक भावना को मजबूत करने में मदद करता है| 

 

To improve the life of the people, Swami Vivekananda started such an organization whose purpose was to serve the poor and raise their level by providing them education. He even targeted to improve the lives of the women of the society.

स्वामी विवेकानंद जी ने जनता के जीवन को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने एक ऐसे संघटन की शुरआत की जिसका उद्देश्य गरीबो की सेवा करना और उन्हें शिक्षा प्रदान करके उनके स्तर को ऊपर उठाना था| यहां तक की उन्होंने समाज की महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने पर भी निशाना साधा| 

 

This is the reason that today Swami Vivekananda's birthday is celebrated as the National Youth Day of India.

यही कारण है कि आज स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिन को भारत के राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है| 

 

 

Swami Vivekananda breathed his last on 4 July 1902 while meditating and his last rites were performed on a sandal pyre on the banks of the Ganges at Belur.

स्वामी विवेकानंद जी ने ध्यान करते हुए 4 जुलाई 1902 को अंतिम सांस ली और उनका अंतिम संस्कार बेलूर में गंगा के तट पर एक चन्दन की चिता पर किया गया|

Some Soulful Thoughts of Swami Vivekananda Ji 

"To be successful, you must have tremendous perseverance, tremendous will." "I'll drink to the sea", says the resolute spirit, "the mountains will crumble according to my will." That kind of energy, that kind of desire: You Work hard and you will surely reach your goal." 

"सफल होने के लिए, आपके पास जबरदस्त द्रढ़ता , जबरदस्त इच्छाशक्ति होनी चाहिए | "में समुन्द्र को पी जाऊंगा ", द्रढ़ता वाली आत्मा कहती है , "मेरी इच्छा के अनुसार पहाड़ उखड जायेंगे " उस तरह की ऊर्जा , उस तरह की इच्छा : तुम मेहनत करो और तुम लक्ष्य तक ज़रूर पहुंच जाओगे| "

 

 

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